प्रतीक्षारत: मैं, मेरा वक्त और उनकी यादें

 Hi/Hello/Namaskar/Shastriyaākaal/Pranam 🙏🏻🙏🏻🙏🏻  

Prashant है बंदे का नाम...

मैं तो अभी इस समय गान्तोक(Gangtok) सिक्किम में हूँ। 

यह ब्लॉग लिखते हुए मैं बंगाल - हिमालयन रेल सेवा जो कि भारत की एक अन्तर्राष्ट्रीय रेल सेवा है, से यात्रा कर रहा हूँ...

पर, आज थोड़ा सा उदास हूँ... हुआ दरअसल यह कि इक काफ़िला निकला तो देखा कि एक लड़की जो बिल्कुल उनके जैसी थी, मतलब कि पीछे वो गुज़र कर गई तो मैंने उन्हें ही महसूस किया, तिफाक से उसका नाम भी उनके नाम पर ही था और यह हमें बाद में पता चला वो भी तब जब हमने उन्हें उनके नाम से न पुकार कर, “सुनो न” कहा... और वो भी उसी अंदाज़ में जैसे मैं उन्हें पुकारता था...



 

Caption1: कुटिलताओं से परे गूढ़ विचारों को निहारता कुञ्ज प्रनिहार...

Caption2: सिक्किम में असम की चाय,
तिब्बत की मोहब्बत मिल जाए..;
तो शायद से कुछ बात बन जाए...!!

खैर चंद लम्हों को किसी तरह बिता कर हमने ख़ुद पर काबू पाया ही था और अपने काम में मशरूफ हो ही रहा था कि हमारी मुलाकात फिर से एक ऐसी शख्सियत से हुई जिनसे हमारी मुलाकात तो कभी नहीं हुई थी लेकिन उन्होंने मुझसे दो बार फोन पर बात ज़रूर की थी। मैं उन्हें शख्सियत इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि वह किसी से कम नहीं और तो और असम में एक विशेष विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने आज हमारी Entrepreneurship या उद्यमशीलता पर G20 (Conclusive Summit) @Sikkim में दी गई प्रस्तुति को न सिर्फ सराहा बल्कि अपने राज्य में एक बार आने का न्योता भी दिया। उनसे हमारी पहली बार फोन पर बात तब हुई थी जब हमने उनके विभाग द्वारा आयोजित की गई परीक्षा को सर्वोत्कृष्ट प्रयास व प्रदर्शन द्वारा प्रथम स्थान से उत्तीर्ण किया था और तब उन्होंने मुझे ऐसा प्रदर्शन देने के लिए पहली बार बात करते हुए बधाइयाँ और भविष्य में इसे नियत बनाए रखने हेतु शुभकामनाएँ भी दी थी। हाँ, पहले और दूसरे स्थान के परीक्षार्थियों के परिणाम में अन्तर भी अच्छा खासा था, और इस बात को जान कर हमें बेहद खुशी हुई थी।


अब सोचने वाली बात तो यह है कि इसमें उदासी का कारण क्या है?


तो बात यह है कि उस परीक्षा को पूरा मन लगाकर हमने जिसके लिए उत्तीर्ण किया था आज वह हमें ........ चुकी है। और अब रह-रह कर उसकी यादें, बातें और उसके लिए किए गए काम, कहीं न कहीं मुझे एकदम से स्तब्ध कर देते हैं।


आज वह शख्सियत हमें अपने घर आने का न्योता दे रहीं थीं, शायद वो हमारे लिए कुछ करना चाहती होंगी परन्तु हमने उनके द्वारा मंच से तारीफों के साथ-साथ दिए गए सुस्पष्ट न्योते को सिर्फ करबद्ध होकर ऊपरी मन से ही स्वीकार किया है। 

उसी समय से आज हम बिल्कुल चुप हो गए हैं, न तो किसी को कुछ बोलने का मन है और न ही किसी को कुछ बताने या जताने का,  क्योंकि यदि हमने कुछ प्रयास भी किया तो मेरी आँखों का सब्र टूट जाएगा...

एक हक़ीक़त तो यह भी है कि हमारी आँखें अब हमारे काबू में न रहीं 😔🥺

परन्तु हम अब उनसे बात करें तो कैसे, मिलें तो कैसे, सपनों में मिलूँ क्या, पर बहाने ढूँढ कर वह झगड़ने लगी तो मैं अब शायद बर्दाश्त न सकूँगा...


अंततः मेरी अब राम जी से यही प्रार्थना है कि उन्हें मलिन कृत्यों, कुबुद्धियों और बुरी आत्माओं से बचाकर रखना...🙏🏻🙏🏻🙏🏻

क्योंकि मुझे उनसे प्यार नहीं, वरन् प्रेम है प्रेम...

 और अनंतकाल तक, एक अटल सत्य की भाँति यह भविष्य में भी विद्यमान रहेगा... और मैं प्रतीक्षारत ...

फिलहाल ये अश्रु धाराएँ अब आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दे रहीं, इसलिए अभी के लिए बस इतना ही 🥺😔

✍️(रे व) प्रशान्त कुमार द्विवेदी 🎙️🎧



Comments

  1. प्रेम गुनाह नहीं, परंतु जब बात आत्मप्रतिष्ठा की हो तब आपको विचार करना चाहिए !! वो जो भी थी उनके अपने कर्मों का फल मिल जाएगा!

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